Saturday, July 28, 2018

आज हम बताएँगे केमुद्रुम योग के बारे में! क्यू ये योग सबसे खराब होता है? क्या है इसके दुष्परिणाम? व कैसे होता है केमुद्रुम भंग योग?

आज हम बताएँगे केमुद्रुम योग के बारे में! क्यू ये योग सबसे खराब होता है? क्या है इसके दुष्परिणाम? व कैसे होता है केमुद्रुम भंग योग?

बहुत से ज्योतिषाचार्यो को कहते सुना होगा आपने की आपकी कुंडली में केमुद्रुम योग है, या किसी जातक की कुंडली में केमुद्रुम योग है, जो की बहुत बुरा होता है इसके बहुत बुरे दुष्परिणाम होते है! लेकिन ये योग होता क्या है? कैसे व किस ग्रह के प्रभाव से बनता है केमुद्रुम योग आइए इसकी जानकारी लेते है—

क्या होता है केमुद्रुम योग?
आप अपनी कुंडली उठाइए और देखिए की चन्द्रमा किस भाव में बैठा हुआ है, अब देखे की चन्द्रमा जिस भी भाव में है उसके साथ कोई अन्य ग्रह है की नही यदि चन्द्रमा के साथ कोई भी ग्रह नही है तब आप देखिए की उसके ठीक पहले वाले भाव में कोई ग्रह है या नही अब यदि उस भाव में कोई भी ग्रह नही है अर्थात वो भाव खाली है तो आप अब देखिए चन्द्रमा जिस भाव में है उसके ठीक आगे वाले भाव में की कोई ग्रह है या नही है यदि उस भाव में भी कोई ग्रह नही हुआ तब आपकी कुंडली में है ये केमुद्रुम योग!

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अर्थात कुंडली में चन्द्रमा से प्रथम भाव ( मतलब चन्द्रमा के साथ ) में, दितीय भाव ( मतलब चन्द्रमा जिस भाव में है के ठीक आगे वाले भाव में ) व बारहवे भाव में ( मतलब चन्द्रमा जिस भाव में है के ठीक पहले वाले भाव में ) में कोई भी ग्रह न हो तो बनता है केमुद्रुम योग!

क्यू केमुद्रुम योग सबसे खराब होता है?
केमुद्रुम योग जिसकी भी कुंडली में होता है बहुत बुरा प्रभाव देता है पहले के लोग कहते थे की राजा के घर जन्मे बालक की कुंडली में यदि ये केमुद्रुम योग हो तो उसके सभी राज वैभव सम्राज्य आलिशिन्ता इत्यादि नष्ट हो जाती है! कहा जाता है की बड़े से बड़ा राज योग केवल और केवल केमुद्रुम योग से नष्ट हो जाता है! केमुद्रुम योग में जन्मा जातक दरिद्र, बुद्धिहीन, विपत्तियों व दुखो से पीड़ित होता है!

क्या सच में केमुद्रुम योग इतना बुरा है? या केवल लोगो को डराया ही जाता है केमुद्रुम योग के नाम से तो आइये जानते है क्या है सच 

कैसे प्रभावी होता है केमुद्रुम योग?
अब तक आप समझ चुके होंगे की केमुद्रुम योग में केवल और केवल चन्द्रमा की ही अहम् भूमिका है! चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण इसका सबसे बड़ा प्रभाव होता है, चन्द्रमा ढाई दिन में अपनी राशी बदलता है! अब यदि चन्द्रमा बुरा या खराब हो तो क्या किसी को अच्छा फल देगा, यही मुख्य कारण है की - केमुद्रुम योग सबसे बुरा होता है किसी भी जातक के लिए! यदि चन्द्रमा कृष्ण पक्ष के षष्ठी तिथि से शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के मध्य का हो अर्थात की चन्द्रमा की कला क्षीण हो तो यह योग बुरा फल देता है! 

कैसे होता है केमुद्रुम योग भंग?
केमुद्रुम योग भंग होने के लिए निम्न नियम है, ऐसा नही है की सभी की कुंडली का केमुद्रुम योग बुरा ही हो और बुरा फल प्रदान करे!

कुंडली में चन्द्रमा पूर्ण बली हो अर्थात वो शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि से कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के बीच का हो तब प्रभाव हीन होगा केमुद्रुम योग! जितना ज्यादा चन्द्रमा बली होगा केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा!  

चन्द्रमा को यदि कोई भी ग्रह देखता है तो भी केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा!

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यदि चन्द्रमा लग्न से केंद्र में हो तो भी केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा! 

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यदि कोई ग्रह चन्द्रमा से केंद्र में हो तो भी केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा!

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लग्न पर गुरु की दृष्टि भी हो तो केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा!

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चन्द्रमा पर गुरु की दृष्टि भी हो तो केमुद्रुम योग के होने से भी कोई प्रभाव नही होगा!

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मै आशा करता हू की आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी! आपको ये जानकारी कैसी लगी इसके बारे में हमें जरुर बताइयेगा! व आगे इसी तरह की ज्योतिष की जानकारी के लिए जुड़े रहिएगा..........

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1 comment:

  1. मस्त है प्रभु । कुछ कुछ समझ आने लगा मुझे ।

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